मलेरिया क्या है,what is malaria कैसे होता है , लक्षण , उपचार , बचाओ जाने पूरी जानकारी

मलेरिया क्या है , what is malaria कैसे होता है , लक्षण , उपचार

 

नमस्कार दोस्तों आज हमलोग इस पोस्ट में पढेंगे की मलेरिया क्या है कैसे होता है कैसे होता है मलेरिया का उपचार कैसे करना है एंटीबायोटिक का उपयोग कब करना है लक्षण , इलाज , बचाओ के बारे में इस पोस्ट में हम इसी के बारे में विस्तार से पढेंगे

मलेरिया क्या है-

मलेरिया एक बीमारी है जो कि परजीवी से होता है, जिसे प्लाजमोडियम कहते हैं। मलेरिया एक व्यक्ति से और व्यक्तियों में फैलने वाली बीमारी है। मलेरिया एक विशेष प्रकार के परजीवी से होता है, जो मादा “एनाफिलिज” मच्छर के काटने पर हमारे शरीर में प्रवेश कर जाता है। मलेरिया दो प्रकार के होते हैं पी.वी. और पी.एफ.। पी.एफ. ज्यादा खतरनाक होता है इसके कारण दिमाग, गुर्दे एवं फेफड़े को नुकसान हो सकता है। मलेरिया देश  की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है।

मलेरिया कैसे फैलता है –

अगर एक मच्छर मलेरिया के मरीज को काटता है तो मलेरिया परजीवी, मरीज के खून से मच्छर के पेट में आ जाता है। जब मच्छर एक स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो परजीवी स्वस्थ व्यक्ति के खून में आ जाता है और उसी में बढ़ना शुरू कर देता है। इस तरह मच्छर मलेरिया के डाकिया का काम करता है और एक आदमी से दूसरे तक इसको फैलाता है।

सबसे ज्यादा खतरा किसको होता है-

गर्भवती और 0 से 5 वर्ष के बच्चों को मलेरिया से ज्यादा खतरा होता है। कुपोषित बच्चों को और भी ज्यादा खतरा होता है।

मलेरिया के लक्षण –

  • अचानक ठंड लग कर बुखार आना, पसीना, सिरदर्द, बदन दर्द होना
  • इससे शरीर में ठिठुरन और जबरदस्त कपकपी के साथ तेज बुखार आ जाता है
  • सामान्यतः बुखार एक-एक दिन छोड़कर आता है
  • मरीज में बहुत कमजोरी आ जाती है
  • मरीज को बुखार के साथ-साथ उल्टियां भी हो सकती है
  • मलेरिया के मौसम (जुलाई से दिसम्बर माह) में दस्त एवं पीलिया के सभी मरीजों की भी मलेरिया का पता लगाने के लिए आर.डी. टेस्ट से जांच करनी चाहिए
आर.डी. टेस्ट से मलेरिया की जांच –
  • आर.डी. टेस्ट से हर बुखार के मरीज की जाँच की जानी है। इससे वहीं पर जाँच करके मलेरिया का पता लगा सकते हैं।
  • आर.डी. टेस्ट को ज्यादा गर्मी से बचाएं। इसे 40° सेंटीग्रेड से कम तापमान में रखें

 

                                                                                        (RD) टेस्ट 

 

  • स्प्रिट स्वाब (रुई का टुकड़ा) की सहायता से बाएं हाथ की छोटी उंगली की पहले वाली उंगली को साफ करें।
  • सुई (लेंसेट) को उंगली पर चुभाएं।
  • उंगली से एक बूंद खून बह जाने दें।
  • फिर उंगली में जो खून बह रहा हो उसमें प्लास्टिक की पतली पाइप को तिरछा करके लगायें जिससे खून पाइप के अंदर आ जायेगा।
  • पतली पाइप की सहायता से जांच पट्टी पर खून को तीर वाले निशान की ओर डालें।
  • टेस्ट किट में बने खण्ड में दो बूंद बफर घोल को डालें।
  • 15 से 20 मिनट के बीच में देखें। 30 मिनट के बाद उसे ना देखें, इसके बाद हो सकता है गलत परिणाम दिखे। इसलिए महत्वपूर्ण है कि बफर डालने के 15 से 20 मिनट के बीच में ही इसे देखना है।

 

जांच का परिणाम देखना

इस जांच को आर.डी. टेस्ट (RDT) कहते हैं।
“सी” (C) निशान में लाइन आने पर मलेरिया नहीं है।
“सी” एवं “पी.वी.” निशान में लाइन आने पर “पी.वी.” (P.v.) मलेरिया है।
“सी” एवं “पी.एफ.” निशान में लाइन आने पर “पी.एफ.” (P.f.) मलेरिया है।

 

इस्तेमाल किये जा चुके आर.डी. टेस्ट का निपटारा:
परिणाम नोट करने के बाद आर.डी. टेस्ट को गड्ढे में डालकर पाट दें।

 

 

पी.एफ. मलेरिया का ए.सी.टी. दवा से इलाज –

पी.एफ. मलेरिया का इलाज ए.सी.टी. दवा से करना है।

पी.एफ. मलेरिया के लिए ए.सी.टी. की खुराक उम्र अनुसार –

उम्र प्रथम दिन दूसरा दिन तीसरा दिन
आरटीसुनेट गोली एस.पी. आरटीसुनेट आरटीसुनेट
1 साल से कम
(छोटा गुलाबी पत्ता)
1 गोली
(25 मिली ग्राम)
1 गोली
(250 + 15 मिली ग्राम)
1 गोली
(25 मिली ग्राम)
1 गोली
(25 मिली ग्राम)
1 – 4 साल
(पीला पत्ता)
1 गोली
(50 मिली ग्राम)
1 गोली
(500 + 25 मिली ग्राम)
1 गोली
(50 मिली ग्राम)
1 गोली
(50 मिली ग्राम)
5 – 8 साल
(हरा पत्ता)
1 गोली
(100 मिली ग्राम)
1 गोली
(750 + 37.5 मिली ग्राम)
1 गोली
(100 मिली ग्राम)
1 गोली
(100 मिली ग्राम)
9 – 14 साल
(बड़ा गुलाबी/लाल पत्ता)
1 गोली
(150 मिली ग्राम)
2 गोली
(500 + 25 मिली ग्राम)
1 गोली
(150 मिली ग्राम)
1 गोली
(150 मिली ग्राम)
15 साल से अधिक
(सफेद पत्ता)
1 गोली
(200 मिली ग्राम)
3 गोली
(500 + 25 मिली ग्राम)
1 गोली
(200 मिली ग्राम)
1 गोली
(200 मिली ग्राम)
गर्भवती
  • गर्भवती महिलाओं को दूसरे-तीसरे तिमाही में ए.सी.टी. दे सकते हैं। परंतु 24 घंटे बुखार नहीं उतरे तो रेफर करें।
  • गर्भवती को पहली तिमाही में ए.सी.टी. दवा न दें। पहली तिमाही में मलेरिया हो तो रेफर करना अनिवार्य है।
  • गर्भवती को कभी भी प्राइमक्विन नहीं देना है।

 

 ACT दवा का  पत्ता उम्र अनुसार

क्र. सं. पत्ते का रंग आयु वर्ग (Age Group) पैक का नाम / प्रकार Artesunate (AS) कंपोजीशन Pyrimethamine + Sulphadoxine (SP) कंपोजीशन
1 छोटा गुलाबी पत्ता 1 वर्ष से कम Antimalarial Combi Blister Pack (< 1 Year) Artesunate I.P. 25 mg (3 Tablets) Pyrimethamine 6.25 mg + Sulphadoxine 125 mg (1 Tablet)
2 पीला पत्ता 1 से 4 वर्ष ACT Combipack (1-4 Years) Artesunate I.P. 50 mg (3 Tablets) Pyrimethamine 25 mg + Sulphadoxine 500 mg (1 Tablet)
3 हरा पत्ता 5 से 8 वर्ष ACT Combipack (5-8 Years) Artesunate I.P. 100 mg (3 Tablets) Pyrimethamine 37.5 mg + Sulphadoxine 750 mg (1 Tablet)
4 बड़ा गुलाबी / लाल पत्ता 9 से 14 वर्ष Antimalarial Combi Blister Pack (9-14 Years) Artesunate I.P. 150 mg (3 Tablets) Pyrimethamine 25 mg + Sulphadoxine 500 mg (2 Tablets)
5 सफेद पत्ता 15 वर्ष से अधिक Antimalarial Combi Blister Pack (15 Years & Above) Artesunate I.P. 200 mg (3 Tablets) Pyrimethamine 25 mg + Sulphadoxine 500 mg (3 Tablets)

 

2. उम्र अनुसार प्राइमाक्वीन (Primaquine) की मात्रा

पीवी मरीजों को 14 दिन primaquine देने से बीमारी दूसरे व्यक्तियों में फैलने को काम किया जा सकता है

आयु वर्ग (Age Group) प्राइमाक्वीन की मात्रा / निर्देश
15 वर्ष से अधिक 15mg प्राइमाक्वीन
9 से 14 वर्ष 10mg प्राइमाक्वीन
5 से 8 वर्ष 5mg प्राइमाक्वीन
1 से 4 वर्ष 2.5mg प्राइमाक्वीन
0 से 1 वर्ष प्राइमाक्वीन नहीं देना है
गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाएँ प्राइमाक्वीन नहीं देना है

पी.वी. मलेरिया का इलाज –

उम्र के अनुसार तीन दिन तक क्लोरोक्वाइन दवा की पूरी खुराक दें

उम्र पहला दिन दूसरा दिन तीसरा दिन
1 साल कम आधी गोली आधी गोली चौथाई गोली
1 से 4 साल एक गोली एक गोली आधी गोली
5 से 8 साल दो गोली दो गोली एक गोली
9 से 14 साल तीन गोली तीन गोली डेढ़ गोली
14 साल के ऊपर चार गोली चार गोली दो गोली

ध्यान रखें –

  • क्लोरोक्वीन गोली खाली पेट न खिलाएं। मरीज को पानी पिलाना चाहिए और खाना खिलाना चाहिए
  • बुखार कम करने के लिए पैरासिटामाल गोली दें
मलेरिया की दवा देते समय ध्यान रखने वाली बातें –
  • मरीज तीनों दिन दवा खाए, इसकी निगरानी करना। दवा शुरू करने वाले हर मरीज को तीन दिन दवा पूर्ण कराना जरूरी है।
  • दवा खिलाने के बाद यदि मरीज को तुरंत उल्टी हो तो दोबारा दवा खिलाना चाहिए। उसके बाद भी उल्टी हो तो मरीज को अस्पताल रेफर करें।
गर्भवती महिलाओं की जांच व इलाज –
  • गर्भवती महिला जब प्रसव पूर्व जांच (ए.एन.सी.) के लिए आये तो उनका आर.डी. किट से जांच करना है, चाहे उसे बुखार हो या ना हो। अतः हर गर्भवती की हर तिमाही में आर.डी. किट से जांच करना है।
  • गर्भवती महिला को झटके आने पर संभावित मलेरिया की जांच आर.डी. किट से करना है तथा 108 या 102 गाड़ी से रेफर करना है।
  • मलेरिया पॉजिटिव (धनात्मक) पाये जाने पर परजीवी की किस्म व गर्भावस्था की अवधि के अनुसार इलाज करना है।
  • प्रथम तिमाही की गर्भवती महिला को यदि पी.एफ. मलेरिया है तो उसके लिए कुनिन टेबलेट 10 मिलीग्राम प्रतिकिलो वजन के अनुसार दिन में 3 बार 7 दिनों तक देना है। कुनिन लेने के कारण गर्भवती महिला के खून में शक्कर की मात्रा कम हो सकती है अतः यह खुराक खाली पेट नहीं देना है। गर्भावस्था के प्रथम तिमाही में ए.सी.टी. से उपचार नहीं दिया जा सकता।
  • दूसरी एवं तीसरी तिमाही की गर्भवती महिला को यदि पी.एफ. मलेरिया है तो उसके लिए ए.सी.टी. उपचार दिया जाये परंतु प्राइमाक्वीन टेबलेट नहीं देना है।
  • प्रथम तिमाही की गर्भवती महिला को यदि पी.वी. मलेरिया है तो उसके लिए तीन दिन तथा क्लोरोक्वीन की गोली खिलायें, प्राइमाक्वीन टेबलेट नहीं देना है।
  • यदि गर्भवती महिला को दवा देने पर बार-बार उल्टी हो तो अस्पताल लेकर जाये
  • मलेरिया के परजीवी और मलेरिया की दवा रोगी के खून में शक्कर की मात्रा कम करते हैं। इसलिए रोगी को कभी भी खाली पेट दवा नहीं देना चाहिए, पानी पिलाते रहना चाहिए खाना देना चाहिए।
  • गर्भवती महिला को प्राइमाक्वीन गोली नहीं देनी है।

दस्त क्या है? कारण,लक्षण, यहाँ से पढ़े

गंभीर मलेरिया के  लक्षण –

  • मरीज तेज बुखार के कारण बड़बड़ा रहा है।
  • मरीज को 6 घंटे से पेशाब नहीं हुआ है।
  • मरीज बेहोश हो गया है।
  • मरीज को झटके आ रहे हैं।
  • मरीज में गंभीर खून की कमी है।
  • बुखार के साथ-साथ पीलिया के लक्षण दिख रहे हैं।
  • मरीज को काला पेशाब हो रहा है।
  • शरीर में लाल रंग के बहुत से दाने दिख रहे हैं।

 

मलेरिया से बचाओ –

 

मच्छरदानी का उपयोग करना चाहिए

मलेरिया क्या है

सामान्य मच्छरदानियों को डेल्टामेथरिन से उपचारित करना चाहिए। डेल्टामेथरिन का असर छः महिने तक रहता है इसलिए छः महिने के बाद दोबारा मच्छरदानी का उपचार करना चाहिए।

नीम की पत्ती/तेल का धुंआ करना चाहिए

  • गड्‌ढों में तेल डालना अथवा उनको पाटना चाहिए
  • पूरे शरीर को ढक कर सोना चाहिए
  • तालाबों में गम्बूजिया मछली पालना चाहिए
  • घर में कूलर, पुराने मटके, टायर आदि में पानी जमा नहीं होने देना चाहिए

अधिक जानकारी यहाँ से देखे :-WHO MALERIA

डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। किसी भी दवा या उपचार को अपनाने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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