आपके बच्चे को भी हो सकता है संक्रमण जाने क्या है लक्षण
आपके बच्चे को भी हो सकता है संक्रमण जाने क्या है लक्षण
नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता ( immunity ) वयस्कों की तुलना में कम होती है, जिससे वे किसी भी प्रकार के संक्रमण (Infection) की चपेट में आसानी से आ जाते हैं। नवजात शिशु और baccho me infection ke lakshan समय पर पहचानना बहुत जरूरी है।”बच्चों में इन्फेक्शन की समय पर पहचान और सही इलाज बेहद आवश्यक है, क्योंकि थोड़ी सी भी लापरवाही शिशु के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
इस ब्लॉग पोस्ट में हम नवजात शिशुओं में संक्रमण के प्रमुख कारण, इसके शुरुआती लक्षण, एंटीबायोटिक दवाओं का सही डोज व इस्तेमाल, और गंभीर स्थिति में बच्चे को कब और कैसे रेफर करना चाहिए—इन सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।infection क्या है
-
नवजात के संक्रमण के कारण
-
संक्रमण के लक्षण
-
संक्रमण का इलाज कैसे होता है एंटिबायोटिक कब देना है
-
एंटीबायोटिक की डोज का निर्धारण कैसे करना है
-
रोगी को कब रेफर करना है
-
रेफरल करने के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें
हमारे देश के गांवों में बहुत से नवजात को गंभीर संक्रमण की समस्या होती है| 10 में से एक बच्चा इसका शिकार अपने जीवन के पहले माह में ही हो जाता हैं|नवजात में गंभीर संक्रमण बहुत खतरनाक होता है|अधिकांश स्थानों में नवजात मृत्यु का यह सबसे बड़ा कारण है बिना इलाज के बच्चे गंभीर संक्रमण के कारण मर जाते हैं इलाज करने पर अधिकांश बच्चों को बचाया जा सकता है|
नवजात में संक्रमण पहले उसके शरीर के एक भाग में आता है जैसे को चमड़ी के, फेफड़े में, अथवा खून में|यह संक्रमण बहुत तेजी से नवजात के नाजुक शरीर शरीर में पूरी तरह फैल जाता है इससे बच्चा सुस्त या बेहोश हो जाता हैं, रोना या दूध पीना छोड़ देता है अथवा ठंडा पड़ जाता है| इसे गंभीर संक्रमण कहते हैं|
बच्चों में संक्रमण के लक्षण (Baccho Me Infection Ke Lakshan) और कारण
-
मां को गर्भावस्था या प्रसव के दौरान संक्रमण हुआ हो |
-
प्रसव यदि सही तकनीक से नहीं कराया गया हो – जैसे प्रसव से ठीक बिना हाथ धोय या सही तरीके से न धोना, गंदे ब्लेड को नाल काटने में उपयोग, नाल को बांधने में गंदे धागे का उपयोग किया हो|
-
यदि नाल साफ और नए ब्लेड से नहीं काटा गया है और नाभि पर विभिन्न तरह की चीजों का उपयोग किया गया हो|
-
नवजात कमजोर है और समय से पूर्व जन्मा है| या नवजात का वजन 2 किलो से कम है|
-
यदि स्तनपान सही तरीके से से नहीं किया गया हो, जन्म के तुरन्त बाद स्तनपान नहीं कराया गया हो, बाहरी वस्तु पिलाई गई हो तो नवजात कमजोर हो जाता हैं और उसमें संक्रमण की संभावन बढ़ जाती है|
-
प्रसव पश्चात यदि नवजात को ठंड लग गई हो|
-
यदि नवजात किसी बीमार व्यक्ति के नजदीक लाया गया हो
नवजात में गंभीर संक्रमण के लक्षण -(baccho me infection ke lakshan)
-
नवजात सुस्त अथवा बेहोश हो
-
रोना धीमा पड़ गया हो अथवा रोना बंद कर दिया हो।
-
कांख का तापमान 37.5 डिग्री centigrate या उससे ज्यादा हो अथवा तापमान 35.5 डिग्री centigrate से कम होने पर।
-
पसली अन्दर धंस रही हो अथवा सांस की गति 60 या 60 प्रति मिनट से अधिक है अथवा सांस लेने में घुरघुराहट की आवाज आती हो।
-
नाभि में मवाद आ रहा हो अथवा त्वचा पर फुंसियाँ हो।
नवजात में संक्रमण का इलाज -(baccho me infection ke lakshan)
एंटीबायोटिक से नवजात में संक्रमण का प्रबंधन –
नवजात के संक्रमण में oral amoxicillin के साथ gentamycin injection देना बहुत ही उपयुक्त और प्रभावी है। संभावित नवजात जिनमें संक्रमण के लक्षण हों उन्हें निम्नलिखित परिस्थितियों में gentamycin injection और amoxicillin oral द्वारा दिया जाना है।
एंटीबायोटिक कब देना है?
-
नवजात को रेफर करने से पहले डोज – दोनों एंटीबायोटिक का पहला डोज रेफर करने से पहले दिया जाना है।
-
एंटीबायोटिक का ऊपर पूरा करने के लिए, अगर नवजात अस्पताल से डिस्चार्ज हो गया है लेकिन उसका दोनों दवाईयों का डोज पूरा नहीं हुआ है तब ऐसे नवजात का दवाई का कोर्स मेडिकल ऑफिसर के कहे जाने पर पूरा करनी होगी|

नोट:-सातों दिनों के लिए एक ही वायल (vial) का उपयोग तभी किया जा सकता है जब वायल का रखरखाव ठीक से किया गया हो और वायल के पदार्थ में कोई गन्दगी या उसके रंग में कोई बदलाव ना आया हो।
अन्य जगह जाने का दौरान
-
बच्चे को कंगारू विधि से मां या फिर नवजात के देखभाल करने वाले के संपर्क में लायें ताकि नवजात के कम तापमान को नियमित किया जा सके।
नवजात को ग्लूकोज की कमी से बचाए
-
यदि नवजात माँ का दूध पी रहा हो तो, नवजात की मां को लगातार दूध पिलाते रहना चाहिए
-
यदि बच्चा दूध नहीं पी रहा हो लेकिन दूध गटकने में कोई दिक्कत ना हो।
-
ऐसी स्थिति में 20–50 मिली (10ml/kg) मां का निकला दूध कटोरी चम्मच के माध्यम से बच्चे को पिलाएं।
-
यदि माँ को दूध न आए तो गाय या बकरी का दूध पिलायें।
-
दोनों दूध के स्त्रोत के ना होने की स्थिति में शक्कर के पानी का उपयोग करें।
शक्कर का पानी बनाने की विधि –
200 ml कप में साफ पानी में 4 छोटे चम्मच शक्कर (20 ग्राम) घोलें और बच्चे को पिलाएं।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। किसी भी दवा या उपचार को अपनाने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करे :-caring for kids
