दस्त क्या है? कारण,लक्षण,03 आसान उपचार what is diarrhea

दस्त क्या है इसका निदान कैसे करे what is diarrhea

नमस्कार दोस्तों आज हमलोग इस पोस्ट में पढेंगे की दस्त क्या है कैसे होता है कैसे होता है निर्जलीकरण कैसे करना है दस्त के उपचार कैसे करना है एंटीबायोटिक का उपयोग कब करना है इस पोस्ट में हम इसी के बारे में विस्तार से पढेंगे |

इस पोस्ट में मुख्य बिंदु -what is diarrhea

 

निर्जलीकरण कैसे करे

  • मूल्याङ्कन करना
  • दस्त का उपचार करना
  • एंटीबायोटिक का उपयोग कब करे
सामान्य दस्त –

दीन में 10 से कम बार दस्त हो रहा हो, दस्त में खून अथवा आंव नहीं जा रहा हो उसे सामान्य दस्त कहते हैं। सामान्य दस्त में दवा देने की जरूरत नहीं है। इसमें खान-पान जारी रखने के साथ बार-बार ओ.आर.एस. घोल देते रहना चाहिए। 6 माह से छोटे बच्चों को स्तनपान जारी रखना चाहिए।

दस्त होने पर क्या करना है –
  • दस्त का पता चलते ही सबसे पहले शरीर में पानी की कमी को दूर करना है। इसके लिए तुरंत ओ.आर.एस. घोल पिलाना शुरू करना होता है। ओ.आर.एस. घोल के पैकेट अनुसार घोल तैयार कर मरीज को हर आधे घण्टे में एक गिलास पिलाते रहना चाहिए। तब तक घोल पिलाएं जब तक मरीज का पेशाब का रंग सामान्य न हो जाये।
  • मरीज को खाना जारी रखना है।
  • जिंक की गोली उपलब्ध हो तो 14 दिन तक देना चाहिए।

दस्त में सूखेपन/गंभीर निर्जलीकरण की पहचान -दस्त क्या है

  • मरीज का सुस्त या बेहोश होना
  • आंखें धंसी हुई होना
  • मरीज पीने में असमर्थ हो
  • मुंह और जीभ का सूख जाना
  • पेट की त्वचा पर चिकोटी भरने से धीरे वापस जाना
  • गहरे रंग का पेशाब होना या 8 घंटे से पेशाब नहीं होना
  • WHATISDIARRHEA

टेबल क्रमांक -01 डायरिया के मरीज में निर्जलीकरण का मूल्याङ्कन what is diarrhea

श्रेणी जांच A (सामान्य) B (कुछ निर्जलीकरण) C (गंभीर निर्जलीकरण)
देखें मरीज की स्थिति अच्छी, बेचैन नहीं है मरीज बेचैन ho, चिड़चिड़ा हो गया हो मरीज सुस्त या बेहोश हो
मरीज की आंखें नॉर्मल हो आंखें धंसी हुई हो आंखें धंसी हुई हो
प्यास की स्थिति सामान्य पानी पी रहा हो मरीज प्यासा हो, बार-बार पानी पिये कम पानी पी रहा हो या असमर्थ हो
महसूस करें पेट की चमड़ी में चिकोटी चमड़ी तुरंत वापस चली जाए चमड़ी धीरे-धीरे वापस जाए चमड़ी बहुत ज्यादा धीरे-धीरे वापस जाए
उपचार निर्णय लें कोई निर्जलीकरण के चिन्ह न दिखे 2 या 2 से ज्यादा चिन्ह (कुछ निर्जलीकरण) 2 या 2 से ज्यादा चिन्ह (गंभीर निर्जलीकरण)
उपचार दें उपचार प्लान A का उपयोग करें वजन नापें और उपचार प्लान B दें वजन लें और तुरंत उपचार प्लान C दें

ध्यान देने वाली बातें –

  • सुस्त होना और नींद में होना दो अलग बातें हैं। एक सुस्त बच्चे में नींद के साथ-साथ बच्चे की मानसिक स्थिति मंद होगी, बच्चा पूरी तरह से जागा हुआ नहीं होगा और बच्चा बेहोशी की ओर बढ़ता जाएगा
  • कुछ बच्चों में सामान्य स्थिति में भी उनकी आंखे धंसी हुई रहती हो। ऐसी स्थिति में जरूरी हो जाता है कि आप बच्चों की मां से पूछें कि बच्चे की आंखें सामान्य दिख रही हैं या सामान्य से धंसी हुई दिख रही हैं।

पेट की चमड़ी में चिकोटी काटना कुपोषित और मोटापे से ग्रसित बच्चों में उपयोगी नहीं है।

कब क्या करेंगे –

मरीज में निर्जलीकरण स्तर के हिसाब से उपचार प्लान इस प्रकार है –

मरीज की स्थिति / लक्षण उपचार योजना
मरीज में निर्जलीकरण के कोई चिन्ह नहीं होने पर उपचार प्लान A
मरीज में कुछ निर्जलीकरण पाए जाने पर उपचार प्लान B
मरीज में गंभीर निर्जलीकरण पाए जाने पर उपचार प्लान C

डायरिया प्रबंधन के उद्देश्य –

  • निर्जलीकरण से बचाव; (यदि निर्जलीकरण के चिन्ह न हों तो)।
  • निर्जलीकरण का इलाज करना; (यदि निर्जलीकरण मौजूद हो तो)।
  • पोषण में हुई क्षति से बचाना; मरीज को समय-समय पर सही आहार देकर (डायरिया के दौरान और डायरिया के बाद मरीज को अनुपूरक जिंक की दवा देकर)।
  • डायरिया की अवधि और तीव्रता को कम करना और मरीज को दोबारा डायरिया से ग्रसित होने से बचाना।

डायरिया प्रबंधन

उपचार प्लान – ए

नियम – 1. निर्जलीकरण से बचाव के लिए मरीज को सामान्य से ज्यादा पेय पीने को दें।
ऐसे पेय पदार्थ जिनमें सामान्यतः नमक हो जैसे कि :-

  • ओ.आर.एस. का घोल।
  • नमक युक्त पानी (उदाहरण : नमक युक्त पसिया, नमक युक्त दही)

सब्जी का सूप जिसमें नमक डाला हो।

कौन से पेय पदार्थ देने से बचना चाहिए :-

  • बाजार में उपलब्ध कार्बोनेटेड शीतल पेय।
  • बाजार में उपलब्ध बोतल बंद फल का रस।
  • मीठी चाय या काफी।
  • किसी भी प्रकार का काढ़ा।

ओ.आर.एस. बनाने का घरेलू तरीका –
सामग्री –

  • पूरा भरा हुआ 6 छोटे चम्मच चीनी
  • 1/2 छोटा चम्मच नमक।
  • 1 लीटर साफ पीने का पानी या उबला हुआ ठण्डा किया हुआ पानी।

विधि –
सारी सामग्रियों को पानी में तब तक मिलाएं जब तक शक्कर और नमक पूरी तरह से घुल जाये।

ओ.आर.एस. कब-कब देना है ?
सामान्यतः नियम यह है कि जब तक डायरिया बंद न हो जाए तब तक पिलाते रहें, लेकिन गाईड के लिए हर बार पतले शौच के बाद ओ.आर.एस. मरीज को पिलाएँ।

ओ.आर.एस. कितना देना है ?
2 साल से कम उम्र के बच्चों में – 50–100 मि.ली. ओ.आर.एस. (एक बड़े कप का पौना भाग)
2 साल से 10 साल तक बच्चों में – 100–200 मि.ली. ओ.आर.एस. (एक बड़े कप का आधा भाग)
10 साल से बड़े बच्चों से वयस्क में – जितना पी सकते हैं उतना पीने को दें।

नियम – 2. मरीज को अनुपूरक जिंक दें।

अनुपूरक जिंक की गोली (10–20 एम जी), 10–14 दिन के लिए दें, डायरिया होने के तुरंत बाद जिंक की गोली शुरू करने से डायरिया की अवधि और गंभीरता में कमी आती हैं। साथ ही निर्जलीकरण का खतरा भी कम होता है।

नियम – 3. मरीज भोजन खाना जारी रखें

  • डायरिया में मुख्यतः बच्चों में सामान्य आहार जारी रखें
  • दूध मुहे बच्चों में स्तनपान जारी रखें
  • ऐसे बच्चे चीन में पतला दस्त हो रहा हो उन्हें सामान्य भोजन चालू रखें
  • निर्जलीकरण को ठीक करने के बाद पतले दस्त से ग्रसित बच्चों में खाना खाना अपने आप बहस हो जाता है जबकि खूनी दर्द से ग्रसित बच्चों में खान-पान की बहाली बहुत कमजोर होती है इसलिए ऐसे मरीजों में खान-पान नियमित करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए

कितना और कब खाना है?

बच्चों को खाना हर तीन घंटे और चार घंटे में दें (1 दिन में 6 बार)

बार बार थोड़ा थोड़ा आहार ज्यादा उपयुक्त है|(what is diarrhea)

उपचार प्लान- बी

  • ओरल रीहाईड्रेशन थेरेपी ऐसे मरीज और ऐसे बच्चों में जिनमें कुछ निजर्लीकरण ही पाया जाए उन्हें ओ.आर.एस. के साथ-साथ ओरल रीहाईड्रेशन थेरेपी की भी जरूरत पड़ती है
  • और साथ-साथ अनुपूरक जिंक देने की भी जरूरत है। नीचे दर्शाया गया टेबल यह आंकलन करने में मदद करता है कि मरीज में कितनी मात्रा में
  • ओ.आर.एस. घोल देने की आवश्यकता है।

पहले 4 घण्टें में बच्चों और वयस्कों में ओ.आर.एस. घोल की अनुमानित मात्रा :-

उम्र वजन ओ.आर.एस. घोल (मि.ली. में)
4 माह से कम 5 किलो से कम 200–400
4–11 माह 5–7.9 किलो 400–600
12–23 माह 8–10.9 किलो 600–800
2–4 साल 11–15.9 किलो 800–1200
5–14 साल 16–29.9 किलो 1200–2200
15 साल से ऊपर 30 किलो से ज्यादा 2200–4000

 

  • मरीज की उम्र तभी उपयोग में लाए जब उसका वजन ज्ञात हो ।
  • ओ.आर.एस. की मात्रा (मि.ली. में) का अनुमान लगाने के लिए मरीज का वजन (किलो) को 75 से गुणा कर दें ।

नोट :- इस थेरेपी के शुरूवाती चरण में, निजीकृत होते हुए भी, एक वयस्क 750 मिली हर घण्टे ले सकता है और यदि जरूरत पड़े तो 20 मि.ली. प्रति किलो प्रति घण्टे दे सकते हैं।

 

चार घण्टे के बाद मरीज की स्थिति परखें :-दस्त क्या है

  • यदि अत्यधिक निजीकरण के चिन्ह दिख रहे हो तो आई.वी. थेरेपी: उपचार प्लान सी चालू कर दें।
  • बहुत कम प्रकरणों में ही ऐसा होता है।
  • यदि ओ.आर.एस. देने के बावजूद दस्त लगातार जा रहे हों (<15-20ml/kg/hr) प्रर्याप्त ओ.आर.एस. नही पी पा रहा हो, लगातार उल्टीयों हो रही हो (ऐसा Cholera में होता है)। ऐसी स्थिति में ओ.आर.एस. (NG) Naso gastoric tube से दें या RL Sol (IV) देना चालू कर दें।
  • निजर्तीकरण के चिन्ह जाने के बाद वापस ओरल रीहाईड्रेशन थेरेपी चालू कर दें।
  • उपाय सी के दौरान अनुपूरक जिंक की गोली लेना और खाना. खाना जारी रखें।

नोट :-यदि बच्चा निर्धारित मात्रा से ज्यादा ओ.आर.एस. के घोल की मांग कर रहा है और उसमें Over-hydration के कोई चिन्ह न हों तब भी उस ओ.आर.एस. देते रहें।

सूजी हुई आंखों की पलकें Over-hydration का चिन्ह है। यदि यह दिखता है तो ओ. आर.एस. घोल देना बंद कर दें लेकिन मां का दूध / पानी और खाना लेते रहें। जब सूजन चली जाए तो उपचार प्लान ए की मुताबिक मरीज को ओ.आर.एस. घोल और घरेलू तरल पदार्थ दें।

उपचार प्लान – सी

आई.वी. द्वारा निजर्लीकरण का उपचार :-

what is diarrhea

  • इसके लिए रिंगर लेक्टेट का उपयोग करें।
  • रिंगर लेक्टेट उपलब्ध न हो तो साधारण से लाइन का उपयोग करें।
  • यदि मरीज पी पा रहा है तो आई.वी. चालू होते तक ओ.आर.एस. घोल पिलाएं।

 

उम्र पहले दें (30ml/kg) फिर दें (70ml/kg) कुल (100ml/1 kg)
एक साल से कम उम्र के बच्चों में 1 घण्टे 5 घण्टे 6 घण्टे
बच्चों और वयस्कों में 30 मिनट 2 ½ घण्टे 3 घण्टे

 

  • मरीज का निरीक्षण करते रहें।
  • पहले 30 मि.ली. प्रति किलो आई.वी. चढ़ाने पर रेडियल पल्स मजबूत होनी चाहिए और बी. पी. ठीक होना चाहिए।
  • दि पल्स बेहतर नहीं होती है तो आई.वी. को अधिक गति से देते रहें।
  • आई.वी. चढ़ाने के बाद जब बी.पी. बेहतर हो जाए पर मरीज पेशाब न कर पा रहा हो और मरीज की सांस तेज हो तो अधिक आई.वी. चढ़ाने से बचना चाहिए।
  • जैसे मरीज की स्थिति बेहतर होती है, ओवरलोड के लक्षण जांच लें-सूजन, तेज सांस आदि।
  • जब तक मरीज की पल्स मजबूत न हो जाए। हर 15-30 मिनट में मरीज का निरीक्षण करते रहें। यदि मरीज पल्स ठीक हो गई हो तो हर 1 घण्टे में मरीज का निरीक्षण करें। यदि पल्स बेहतर नहीं होती है तो आई.वी अधिक गति से देते रहें।
  • जब वयस्क में तीन घण्टे का और बच्चों में 6 घण्टे की आई.वी. की मात्रा देना पूरी हो जाए तब मरीज का दोबारा निरीक्षण करें जैसा टेबल क्रमांक 1 में दिया गया है।
  • टेबल क्रमांक 1 की सहायता से मरीज का पुनःमुल्यांकन करने के बाद मरीज की स्थिति के अनुसार आगे का उपचार प्लान करें और उपचार प्लान – ए दौहरायें ।
  • ध्यान देने वाली बातें –
  • यदि शौच के साथ खून भी जा रहा हो तो यह पेंचिस (Dysentry) है।
  • यदि पानी जैसे दस्त के साथ-साथ उल्टियाँ भी हो रही हो तो यह हैजा (Cholera)।
  • यदि डायरिया 14 दिन या उसे अधिक दिन से हो रहा हो तो यह लगातार दस्त
  • (Persistent Diarrhoea) की स्थिति है।

दस्त के कारण गंभीर निर्जलीकरण के मरीज के लिए एन्टीबायटिक -(what is diarrhea)

  • अगर मरीज 5 साल से अधिक आयु का है और पतला दस्त उल्टी के साथ हो रहा है तो हैजा की संभावना हो सकती है। ऐसे मरीज को निर्जलीकरण के लिए इलाज के बाद प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भेजना चाहिए। यदि तुरंत रेफर हो पाना संभव न हो तो
  • डॉक्सिसाइक्लिन दवा दे सकते हैं।
  • व्यस्क – 300 mg तुरंत और रेफर करें अगर रेफर करने की सुविधा ना हो तो 500 mg दिन में दो बार दें।
  • यदि गंभीर निर्जलीकरण का प्रकरण खूनी दस्त के साथ हो तो यह शिगेला संक्रमण हो सकता है। ऐसे मरीज को निर्जलीकरण इलाज के बाद प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भेजना चाहिए।

बच्चो में इन्फेक्शन के लक्षण यहाँ से पढ़े

दस्त से बचाव के लिए क्या करना चाहिए(what is diarrhea)

डायरिया का बचाव

  • दस्त से बचाव के लिए हाथ धोने संबंधी जरूरी सलाह जैसे-शौच के बाद साबुन से. भोजन बनाने से पहले हाथ धोना चाहिए।
  • भोजन खाने या खिलाने से पहले हाथ धोना चाहिए।
  • ка बच्चों का शौच साफ करने के बाद हाथ धोना आदि के बारे में बताना चाहिए।
  • भोजन और पेयजल को ढंक कर रखना चाहिए।
  • पानी निकालने के लिए हत्थे वाले बर्तन का उपयोग करना चाहिए।
  • पानी में क्लोरीन की दवा पीसकर डालने के बारे में बताना चाहिए (20 लीटर-लगभग 1 मटका पानी में एक गोली पीसकर डालना है एक घण्टे बाद में इस पानी को पीया जा सकता है)।
  • पानी उबालकर पीने की सलाह देना चाहिए (यदि और कोई विधि उपलब्ध न हो तो)।
  • खेत में या अन्य जगह काम पर जा रहे हों तो घर से साफ पानी साथ लेकर चलें। डोडही का पानी दूषित हो सकता है। बाजार में होटल आदि का पानी भी नहीं पीना चाहिए।
  • हैण्डपंप के आसपास शौच नहीं करना चाहिए।
  • शौच के लिए शौचालय का उपयोग करने के बारे में बताना चाहिए।
  • कुंआ का पानी पी रहे हों तो हर दो तीन दिन में ब्लीचिंग पावडर का घोल डालने के बारे में बताना चाहिए।

नॉट :- यदि बच्चो में यह समस्या दिखे तो दस्त का इलाज तुरंत सुरु करे 

 

डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। किसी भी दवा या उपचार को अपनाने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

(what is diarrhea)

अधिक जानकरी यहाँ से देखे :-WHO

 

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